

*मुख्य न्यायाधीश गवई पर जूता फेंकने वाले अधिवक्ता पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो – अजाक्स की कड़ी मांग*
संविधान और न्यायपालिका का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता —
जांजगीर में अजाक्स ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को किया संबोधित
जांजगीर, 10 अक्टूबर 2025।
छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. गवई पर जूता फेंकने की घटना को भारतीय लोकतंत्र और संविधान पर सीधा प्रहार बताया है। संघ ने इसे घोर असंवैधानिक, अमर्यादित और राष्ट्रविरोधी कृत्य करार देते हुए दोषी अधिवक्ता राकेश किशोर के विरुद्ध देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने, एवं कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
अजाक्स पदाधिकारियों ने आज 10 अक्टूबर 2025 को जांजगीर में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जो भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को संबोधित है। ज्ञापन में कहा गया है कि —
“मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकना न केवल व्यक्ति का अपमान है, बल्कि भारतीय संविधान और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला राष्ट्रद्रोही कृत्य है।”
संघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के अपराधों पर तुरंत और कठोर कार्यवाही नहीं हुई, तो यह संविधान-विरोधी मानसिकता को बढ़ावा देगा, जो राष्ट्रहित के लिए घातक सिद्ध होगा।
वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। ऐसी घटनाएँ भारत के लोकतांत्रिक ढाँचे के लिए गंभीर खतरा हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।
इस अवसर पर उपस्थित रहे –
बी. आर. रत्नाकर, डॉ. संजय कुमार, डॉ. चंद्रशेखर खरे, डॉ. विजय मनहर, जितेंद्र खरे, एस.पी. बौद्ध, ओमप्रकाश कुर्रे, चन्द्रकुमार मिरी, पी.एल. महिपाल, ललित कुर्रे, हरप्रसाद बंजारे, रमेश भार्गव, डॉ. कुंज किशोर, नंदलाल कुर्रे, एडवोकेट लक्ष्मी लहरे, मंजू रात्रे, पूजा साहू, अर्चना गोपाल, नूतन राठौर, भजन दास टंडन, ए.डी. आजाद, उमेश डहरिया, मिथुन भास्कर सहित बड़ी संख्या में संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अजाक्स ने कहा कि –
“संविधान की रक्षा और न्यायपालिका की मर्यादा बनाए रखना ही सच्ची देशभक्ति है। ऐसे असंवैधानिक कृत्य करने वालों को राष्ट्रद्रोही मानकर कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए।”
*छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स)*
