

सत्य, समानता और समाज सुधार का संदेश देती फिल्म गुरु बालकदास
गुरु बालकदास फ़िल्म के लिए उमड़ा जनसैलाब, मेट्रो सिनेमा जांजगीर रहा हाउसफुल
सतनामी समाज की ऐतिहासिक पहल – गुरु बालकदास पर बनी फ़िल्म को मिला अपार स्नेह
नरबली, जाति व्यवस्था व अंधविश्वास के खिलाफ गुरु बालकदास जी का संदेश फ़िल्म के माध्यम से जीवंत
गुरु बालकदास जी की शिक्षाओं पर आधारित फ़िल्म देखने उमड़ा समाज, सीट न मिलने पर लोग ज़मीन पर बैठे
जांजगीर में अभूतपूर्व उत्साह
जांजगीर।
*सर्व सतनामी समाज जांजगीर द्वारा आयोजित गुरु बालकदास फ़िल्म का विशेष प्रदर्शन रविवार को स्थानीय मेट्रो सिनेमा हॉल में किया गया। फ़िल्म को देखने के लिए अपार भीड़ उमड़ पड़ी और सिनेमा हॉल पूरी तरह हाउसफुल रहा। स्थिति ऐसी रही कि अनेक दर्शकों को ज़मीन पर बैठकर फ़िल्म देखनी पड़ी। यह उत्साह गुरु बालकदास जी के प्रति समाज की गहरी आस्था और श्रद्धा को दर्शाता है।*
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ संजय कुमार ने बताया कि यह फ़िल्म सतनामी समाज के महान संत, समाज सुधारक और युगदृष्टा गुरु बालकदास जी के जीवन पर आधारित है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि किस प्रकार गुरु बालकदास जी ने उस समय की कुरीतियों और अंधविश्वासों के विरुद्ध आवाज उठाई। उन्होंने नरबली, जाति व्यवस्था, सती प्रथा और समाज में व्याप्त अंधविश्वासों का कड़ा विरोध किया तथा समाज को समानता, भाईचारा और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
फ़िल्म में गुरु बालकदास जी की शिक्षा और उनके द्वारा दिए गए उपदेशों को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। सत्य, अहिंसा, न्याय और सामाजिक समरसता को उन्होंने अपना जीवन उद्देश्य बनाया। उन्होंने स्वतंत्र आंदोलन में अग्रेजों और मराठों का विरोध किया, उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और युवा पीढ़ी को नई दिशा प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर सर्व सतनामी समाज जांजगीर के पदाधिकारियों ने कहा कि गुरु बालकदास जी के जीवन और उनके संघर्षों को चलचित्र के माध्यम से प्रस्तुत करना एक ऐतिहासिक पहल है। इससे नई पीढ़ी को उनके योगदान और समाज सुधार के प्रयासों की गहरी जानकारी मिलेगी।
