
जांजगीर-चांपा: ऐतिहासिक भीमा तालाब की बदहाली पर फूटा लोगों का गुस्सा, विधायक ब्यास कश्यप के नेतृत्व में जनआंदोलन, प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम
जांजगीर-चांपा। जिले के ऐतिहासिक भीमा तालाब की बदहाल स्थिति और लगातार बढ़ती गंदगी को लेकर लोगों का आक्रोश अब जनआंदोलन का रूप लेने लगा है। शहर की ऐतिहासिक धरोहर माने जाने वाले भीमा तालाब की सफाई और संरक्षण की मांग को लेकर बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप की अपील पर आयोजित इस जनआंदोलन में स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और नगरपालिका तथा जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने तालाब में पहुंच रहे दूषित पानी और आसपास की दुकानों से निकलने वाले कचरे पर नाराजगी जताते हुए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शहर की पहचान और ऐतिहासिक महत्व रखने वाला भीमा तालाब लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। तालाब में आसपास की नालियों का गंदा पानी पहुंच रहा है। इसके अलावा आसपास संचालित होटल और मांस-मटन की दुकानों से निकलने वाली गंदगी भी तालाब तक पहुंचने का आरोप लगाया गया है। इससे तालाब की स्वच्छता प्रभावित होने के साथ ही जल प्रदूषण और पर्यावरणीय नुकसान की आशंका बढ़ रही है।
आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि भीमा तालाब जांजगीर शहर की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह तालाब केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से भी जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद तालाब की नियमित सफाई, रखरखाव और संरक्षण को लेकर जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि लगातार गंदगी पहुंचने से तालाब की स्थिति बिगड़ती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या के समाधान के प्रति पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।
विधायक ब्यास कश्यप की अपील पर जुटे नागरिकों ने तालाब की बदहाली को लेकर नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन के दौरान नगरपालिका और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए गए। आंदोलनकारियों ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। यदि समय रहते तालाब में गंदगी पहुंचने पर रोक नहीं लगाई गई और सफाई के लिए ठोस व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो आने वाले समय में इसकी स्थिति और गंभीर हो सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि भीमा तालाब में नालियों से पहुंचने वाले दूषित पानी को तत्काल रोका जाए। इसके लिए जल निकासी और दूषित पानी के उचित प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जाए। साथ ही आसपास संचालित होटल, दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे का व्यवस्थित निपटान सुनिश्चित किया जाए, ताकि तालाब में किसी भी प्रकार की गंदगी न पहुंच सके।
लोगों ने तालाब की नियमित सफाई के साथ इसके दीर्घकालीन संरक्षण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने की भी मांग की। उनका कहना है कि केवल एक बार सफाई अभियान चलाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए नगरपालिका और संबंधित विभागों को नियमित निगरानी, कचरा प्रबंधन और जल संरक्षण की प्रभावी व्यवस्था करनी होगी।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि भीमा तालाब के संरक्षण को लेकर अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासन को समस्या के समाधान और ठोस कार्रवाई शुरू करने के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर तालाब की सफाई और संरक्षण की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो नगरपालिका कार्यालय का घेराव किया जाएगा।


